चंडीगढ़। ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) बिल, 2026’ को विधानसभा में सर्वसम्मति से पास कर दिया गया। अब सबकी नजरें पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया पर टिकी हुई हैं कि क्या वह इस बिल को मंजूरी देंगे या वह बिल को राष्ट्रपति के पास भेज देंगे।
आबकारी एवं कराधान मंत्री हरपाल चीमा का कहना है कि 2021 में तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी एक्साइट एक्ट में संशोधन कर आजीवन कारावास का प्रावधान किया था। जिसे राज्यपाल ने ही मंजूरी दी थी। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील आरएस बैंस का कहना हैं, राष्ट्रपति की मंजूरी के बिना इस बिल को लागू नहीं किया जा सकता।
सीएम मान बिल को लेकर आश्वासित
वहीं, मुख्यमंत्री भगवंत मान इस बिल को राज्यपाल द्वारा मंजूरी दिए जाने को लेकर खासे आश्वस्त हैं। उन्होंने ने तो सदन में ही यह गारंटी दे दी थी कि बेअदबी को लेकर पांचवीं बार सदन में बिल नहीं आएगा। क्योंकि उन्होंने न सिर्फ इस बिल को बनाने में कानूनी राय की प्रक्रिया पूरी की हैं बल्कि धार्मिक पहलुओं पर भी चर्चा हुई है। अहम बात यह कि जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) बिल में किए गए सजा के प्रावधान को लेकर जानकारों में मतभिन्नता है।
पूर्व एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया, वरिष्ठ वकील, पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट मोहन जैन का कहना है कि भारत के संविधान के अनुसार, अगर कोई राज्य ऐसा कानून बनाता है जिसमें सजा बहुत कड़ी हो (जैसे उम्रकैद या उससे अधिक) या वह पहले से मौजूद केंद्रीय कानूनों) से टकरा सकता हो तो उसे राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है। इस मामले में भी ऐसा हो सकता है।
‘राज्यपाल मंजूरी देंगे, संभावना कम’
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व आनरेरी सेक्रेटरी जसमीत भाटिया का कहना हैं, राज्य अपना कानून तो बना सकता है लेकिन इस बिल में जो सजा का प्रावधान किया गया है, वह केंद्र से टकरा रहा हैं। राज्यपाल इसे मंजूरी दे देंगे इसकी संभावना कम ही है।
वहीं, एक्साइज एंड टैक्सेशन मंत्री हरपाल चीमा जोकि खुद भी वकील हैं का कहना हैं, जब एक मामले में राज्यपाल ने मंजूरी दे दी हैं तो वह एक बड़ा आधार होता है। एक्साइज बिल, जिसे तत्कालीन पंजाब गवर्नर वीपी सिंह बदनोर ने 24 मार्च, 2021 को मंज़ूरी दी थी।
भले ही यह बिल शराब में जहरीले पदार्थ या बाहरी चीज को मिलाने का था लेकिन इसमें भी आजीवन कारावास का प्रावधान किया गया है। जिसे राज्यपाल ने मंजूरी दी। असली मुद्दा सजा के प्रावधान को लेकर हैं। इसलिए बेअदबी करने वालों को आजीवन कारावास देने वाले बिल को भी राज्यपाल मंजूरी दे सकते हैं।
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