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328 पावन स्वरूप मामले में जांच पर SGPC की आपत्ति, SIT पर अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने के आरोप

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अमृतसर। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने 328 पावन स्वरूपों के मामले की जांच के लिए पंजाब सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की कार्यप्रणाली पर आपत्ति जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईटी अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के आंतरिक और प्रशासनिक मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप कर रही है।

धामी ने कहा कि जांच के नाम पर सिखों की प्रमुख धार्मिक संस्था की संवैधानिक पहचान और अधिकारों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। एसजीपीसी ने शुरू से ही पूरी पारदर्शिता और गंभीरता के साथ जांच टीम को सहयोग दिया है तथा श्री अकाल तख्त साहिब के निर्देशों के अनुसार हर आवश्यक जानकारी उपलब्ध करवाई गई है।

329 पावन स्वरूपों के मामले में कोई संबंध नहीं: धामी

उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बावजूद एसआईटी लगातार ऐसी जानकारियां मांग रही है, जिनका 328 पावन स्वरूपों के मामले से कोई सीधा संबंध नहीं है। धामी के अनुसार एसआईटी द्वारा एसजीपीसी के वित्तीय खातों, बैंक लेन-देन और आर्थिक विवरणों की मांग करना उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।

कभी एसआईटी अपने प्रतिनिधियों को बैंकों में भेजकर खातों की जानकारी जुटाने का प्रयास कर रही है, तो कभी पत्रों के माध्यम से विस्तृत वित्तीय रिकॉर्ड मांगे जा रहे हैं। इसके अलावा निजी चैनलों ईटीसी और जी नेक्स्ट मीडिया के साथ गुरबाणी कीर्तन प्रसारण को लेकर हुए समझौतों का ब्यौरा भी मांगा गया है, जबकि इनका 328 पावन स्वरूप मामले से कोई संबंध नहीं है।

जानकारी बार-बार मांगी जा रही है: धामी

धामी ने यह भी कहा कि जो जानकारियां पहले ही एसआईटी को उपलब्ध करवाई जा चुकी हैं, उन्हें बार-बार दोबारा मांगा जा रहा है। उनके अनुसार यह सब जांच के मूल उद्देश्य से हटकर किया जा रहा है और इससे यह संकेत मिलता है कि जांच टीम किसी अन्य मंशा के तहत काम कर रही है।

एसजीपीसी अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार एसआईटी के जरिए सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था के संवैधानिक अधिकारों को निशाना बनाने का प्रयास कर रही है। यह केवल एसजीपीसी का मुद्दा नहीं, बल्कि सिख संस्थाओं की स्वायत्तता और अधिकारों से जुड़ा संवेदनशील विषय है। एसआईटी अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर न जाए और केवल 328 पावन स्वरूपों की जांच तक ही सीमित रहे।

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