वरिष्ठ संवाददाता : रमन ठाकुर
ग्रेटर नोएडा यमुना विकास प्राधिकरण (YEIDA) के तहत आने वाला ‘यमुना शहर’ (जेवर), जो कभी एक शांत और खेती-किसानी वाला इलाका माना जाता था, आज देश ही नहीं बल्कि दुनिया के सबसे बड़े रियल एस्टेट और इंडस्ट्रियल हॉटस्पॉट में बदल चुका है। मार्च 2026 में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) के पहले फेज का उद्घाटन होने के बाद से इस पूरे कॉरिडोर की तकदीर पूरी तरह बदल गई है। इस एयरपोर्ट के आने से जेवर कितना बदला है, प्रॉपर्टी के रेट्स किस रफ्तार से बढ़े हैं, और इसका ग्रेटर नोएडा शहर को क्या फायदा हुआ है, आइए इसे विस्तार से समझते हैं।
जेवर और यमुना एक्सप्रेसवे का कायाकल्प: तब और अब
एयरपोर्ट परियोजना के जमीन पर उतरने से जेवर एक ग्लोबल ‘एयरोट्रोपोलिस’ (एक ऐसा शहर जो एयरपोर्ट के इर्द-गिर्द विकसित होता है) का रूप ले रहा है। पिछले कुछ सालों में यहाँ विकास की रफ्तार इस तरह बदली है:
लॉजिस्टिक्स और इंडस्ट्रियल हब: जेवर एयरपोर्ट के पास केवल उड़ानों की सुविधा नहीं है, बल्कि यहाँ बड़े पैमाने पर कार्गो टर्मिनल, डेटा सेंटर्स, टॉय पार्क, टेक्सटाइल पार्क और मेडिकल डिवाइस पार्क बन रहे हैं।
सेमीकंडक्टर क्लस्टर: ग्रेटर नोएडा और यमुना सिटी का यह क्षेत्र अब देश के सबसे बड़े सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभर रहा है, जिससे लाखों हाई-स्किल नौकरियां पैदा हो रही हैं।
इंटरनेशनल फिल्म सिटी: जेवर एयरपोर्ट के ठीक पास ही प्रस्तावित विशाल फिल्म सिटी इस क्षेत्र के ग्लैमर और कमर्शियल वैल्यू को एक अलग ही स्तर पर ले जा रही है।
शानदार कनेक्टिविटी: रैपिड रेल कॉरिडोर, मेट्रो का विस्तार और एक्सप्रेसवे का नेटवर्क अब जेवर को दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और आगरा से सीधे जोड़ रहा हैं।
हाल ही में लागू हुई YEIDA की नई आवासीय प्लॉट योजनाओं (जैसे सेक्टर्स 15C, 18, 24A) में अलॉटमेंट रेट करीब ₹36,260 प्रति वर्ग मीटर तय किए गए हैं, लेकिन रीसेल मार्केट (Secondary Market) में प्रीमियम बहुत अधिक बढ़ चुका है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि एयरपोर्ट से फ्लाइट्स की फ्रीक्वेंसी बढ़ने के साथ ही अगले दो सालों में रेट्स 20% से 30% और बढ़ सकते हैं।
एयरपोर्ट आने से ग्रेटर नोएडा शहर को क्या फायदा हुआ?
जेवर में एयरपोर्ट आने का सबसे बड़ा और सीधा फायदा ग्रेटर नोएडा को मिला है। ग्रेटर नोएडा अब दिल्ली-NCR के किसी भी अन्य शहर के मुकाबले अधिक मजबूत और आत्मनिर्भर हो गया है।
कॉर्पोरेट और मल्टीनेशनल कंपनियों का रुख: जेवर एयरपोर्ट की नजदीकी के कारण वैश्विक कंपनियों ने ग्रेटर नोएडा में अपने पैर जमाने शुरू कर दिए हैं। कंपनियों के बड़े अधिकारियों और विदेशी डेलिगेट्स के लिए अब दिल्ली के आईजीआई (IGI) एयरपोर्ट जाने की मजबूरी खत्म हो गई है, जिससे यात्रा का समय काफ़ी कम हो गया है।
इंफ्रास्ट्रक्चर का अपग्रेड: ग्रेटर नोएडा की सड़कों का चौड़ीकरण, नए फ्लाईओवर, और एक्वा लाइन मेट्रो का जेवर तक विस्तार जैसी बुनियादी ढांचागत परियोजनाएं केवल एयरपोर्ट की वजह से ही इतनी तेजी से पूरी हो पा रही हैं।
जेवर एयरपोर्ट ने यमुना एक्सप्रेसवे को उत्तर भारत का सबसे बड़ा इन्वेस्टमेंट कॉरिडोर बना दिया है। इसका सीधा असर यह हुआ है कि ग्रेटर नोएडा अब सिर्फ नोएडा का ‘एक्सटेंशन’ नहीं रहा, बल्कि दिल्ली-NCR का सबसे आधुनिक, सुनियोजित और पसंदीदा बिजनेस व रेजिडेंशियल डेस्टिनेशन बन चुका है।
यमुना प्राधिकरण और जेवर विधायक की अहम भूमिका :
जेवर को इस मुकाम तक पहुँचाने और एक नए ग्लोबल सिटी के रूप में स्थापित करने के पीछे यमुना विकास प्राधिकरण (YEIDA) और स्थानीय जेवर विधायक का जमीनी प्रयास सबसे बड़ा संबल रहा है।
यमुना प्राधिकरण ने जहाँ एक तरफ पारदर्शी नीतियों, त्वरित सिंगल-विंडो क्लीयरेंस और विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) को धरातल पर उतारकर विदेशी व घरेलू निवेशकों का भरोसा जीता, वहीं दूसरी तरफ जेवर विधायक ने किसानों और स्थानीय जनता के साथ निरंतर संवाद बनाए रखा। उन्होंने भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) जैसी बड़ी चुनौतियों को आपसी सूझबूझ और सौहार्दपूर्ण तरीके से हल कराया, जिससे यह देश का सबसे सुगम और विवाद-रहित भूमि अधिग्रहण मॉडल बना।
प्रशासनिक स्तर पर यमुना प्राधिकरण की दूरगामी सोच और राजनैतिक स्तर पर विधायक की जन-सहानुभूति व दृढ़ इच्छाशक्ति के इसी तालमेल ने जेवर को पिछड़ेपन से निकालकर आज विकास के इस ग्लोबल मंच पर खड़ा कर दिया है।
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