स्पेशल रिपोर्ट:
🖋️करतार सिंह की कलम से🖋️
जयपुर: गुलाबी नगरी जयपुर की नागरिक व्यवस्थाओं को संभालने और शहर के विकास का ढांचा तय करने में जयपुर नगर निगम की भूमिका हमेशा अहम रही है। समय-समय पर शहर को दिशा देने के लिए अलग-अलग मेयरों ने कमान संभाली, लेकिन जनता की राय और विकास कार्यों के लिहाज से किसका कार्यकाल सबसे असरदार रहा, यह हमेशा चर्चा का विषय बना रहता है। अशोक लाहोटी, विष्णु लाटा और डॉ. सौम्या गुर्जर के कार्यकालों की तुलनात्मक समीक्षा करके शहर के सबसे मजबूत और प्रभावी कार्यकाल को समझा जा सकता है।
अशोक लाहोटी :प्रशासनिक अनुशासन और इंफ्रास्ट्रक्चर का दौर
अशोक लाहोटी (2016-2018) का कार्यकाल प्रशासनिक कड़ाई और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए जाना जाता है।
प्रमुख उपलब्धियां: शहर की स्वच्छता रैंकिंग में सुधार, डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण प्रणाली को गति देना और अतिक्रमण के खिलाफ कड़े कदम उठाना।
कार्यशैली: लाहोटी को एक कड़े प्रशासक के रूप में देखा गया, जिन्होंने पार्षदों और अधिकारियों पर जवाबदेही तय की।
चुनौतियां: कड़क रवैये के कारण कई बार उन्हें अपनी ही पार्टी और विपक्ष के विरोध का सामना करना पड़ा।
विष्णु लाटा: राजनीतिक उथल-पुथल और संतुलन का दौर
अशोक लाहोटी के विधायक बनने के बाद विष्णु लाटा (2019–2020) ने मेयर पद की कमान संभाली। लाटा का कार्यकाल राजनीतिक दृष्टि से काफी हलचल भरा रहा।
प्रमुख उपलब्धियां: जयपुर को यूनेस्को (UNESCO) की ‘वर्ल्ड हेरिटेज सिटी’ की सूची में शामिल कराने की प्रक्रिया के दौरान शहर के रख-रखाव पर ध्यान देना।
कार्यशैली: लाटा का फोकस आम जनता से संवाद बनाए रखने और निगम के भीतर समन्वय बिठाने पर अधिक था।
चुनौतियां: राजनीतिक खींचतान और सीमित समय मिलने की वजह से वे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को शुरू नहीं कर सके।
डॉ. सौम्या गुर्जर: ग्रेटर निगम, नई योजनाएं और संघर्ष
साल 2020 में नगर निगम के दो हिस्सों (ग्रेटर और हेरिटेज) में बंटने के बाद डॉ. सौम्या गुर्जर ग्रेटर निगम की मेयर बनीं।
प्रमुख उपलब्धियां: सफाई कर्मचारियों के मुद्दों का निपटारा, महिला सशक्तिकरण से जुड़ी नीतियां और नई डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण मशीनों की तैनाती।
कार्यशैली: सौम्या गुर्जर को जन-सुनवाई और जमीनी स्तर पर जनता से जुड़ने के लिए जाना जाता है।
चुनौतियां: राज्य सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ खींचतान, और पद से निलंबन-बहाली जैसे कानूनी विवादों ने उनके कार्यकाल के काम की गति को प्रभावित किया!
रिपोर्टर डायरी: किसका कार्यकाल रहा ‘सबसे बेहतर’?
मापदंड , अशोक लाहोटी,
प्रशासनिक नियंत्रण. : अति उत्तम
जनसंपर्क व संवाद. : औसत
स्वच्छता व इंफ्रास्ट्रक्चर: ठोस पहल
राजनीतिक स्थिरता : स्थिर
मापदंड. विष्णु लाटा
प्रशासनिक नियंत्रण : मध्यम
जनसंपर्क व संवाद : अच्छा
स्वच्छता व इंफ्रास्ट्रक्चर: निरंतरता
राजनीतिक स्थिरता : अल्पकालिक
मापदंड. डॉ सौम्या गुर्जर
प्रशासनिक नियंत्रण : संतोषजनक
जनसंपर्क व संवाद : उत्तम
स्वच्छता व इंफ्रास्ट्रक्चर: नए सुधार
राजनीतिक स्थिरता :अत्यधिक उतार- चढ़ाव
निष्कर्ष:
यदि प्रशासनिक मजबूती, सख्त फैसलों और स्वच्छता ढांचा विकसित करने के आधार पर देखा जाए, तो अशोक लाहोटी का कार्यकाल सबसे प्रभावशाली और परिणाम देने वाला माना जाता है। वहीं, आम जनता से जुड़ाव और विपरीत परिस्थितियों में काम करने के लिहाज से डॉ. सौम्या गुर्जर की भूमिका अहम रही। विष्णु लाटा का कार्यकाल संतुलन बनाए रखने तक सीमित रहा।
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