वार्ड का लाल ही बनेगा पार्षद, बाहरी थोपा तो जमानत जब्त”
फुलेरा। रिपोर्ट—डब्लू गोस्वामी। स्थानीय निकाय चुनाव 2026 को लेकर फुलेरा एवं दूदू विधानसभा क्षेत्र में सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। फुलेरा, सांभर,दूदू, और नरैना नगरपालिकाओं में टिकट को लेकर दावेदारों की सक्रियता बढ़ गई है। वार्डों की लॉटरी और नए परिसीमन के बाद कई पुराने सियासी समीकरण बदल गए हैं, जिससे नेताओं के सामने नई राजनीतिक चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
आरक्षण ने बदला दिग्गजों का गणित
वार्ड आरक्षण की लॉटरी में कई ऐसे वार्ड आरक्षित हो गए, जिन्हें राजनीतिक दिग्गज अपना मजबूत गढ़ मानते थे। इसके बाद अब कुछ नेताओं द्वारा दूसरे वार्डों से चुनावी मैदान में उतरने की तैयारियों की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इसी को लेकर स्थानीय स्तर पर ‘पैराशूट उम्मीदवार’ का मुद्दा गर्माता नजर आ रहा है।
मतदाताओं का दो टूक संदेश
वार्डवासियों का कहना है कि पार्षद का टिकट ऐसे व्यक्ति को मिलना चाहिए, जो उसी वार्ड का निवासी हो, मतदाता सूची में उसका नाम दर्ज हो और लंबे समय से वार्ड की जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं को समझता हो।
मतदाताओं का कहना है कि “वार्ड का लाल ही वार्ड का पार्षद बनेगा। बाहर से उम्मीदवार थोपा गया तो जनता चुनाव में इसका जवाब देगी और जमानत तक जब्त करा देगी।”
टिकट वितरण पर टिकी निगाहें
नगरपालिका अध्यक्ष पद सामान्य होने के चलते अध्यक्ष पद के दावेदारों की संख्या भी बढ़ती दिखाई दे रही है। वहीं पार्षद टिकट के लिए भाजपा, आरएलपी, और कांग्रेस सहित विभिन्न राजनीतिक दलों में दावेदार अपनी-अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर रहे हैं।
ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि राजनीतिक दल स्थानीय चेहरे को प्राथमिकता देंगे या राजनीतिक सिफारिशों के सहारे बाहरी उम्मीदवारों को मैदान में उतारेंगे। फुलेरा की चुनावी राजनीति में फिलहाल एक बात साफ नजर आ रही है—मतदाता अपने वार्ड में स्थानीय चेहरे को ही प्राथमिकता देने के मूड में हैं।
आने वाले दिनों में टिकट वितरण के बाद यह तस्वीर और साफ होगी कि ‘पैराशूट लैंडिंग’ सफल होती है या वार्ड के स्थानीय चेहरे बाजी मारते हैं।
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