Home राजस्थान खौफ में लोग, बेखौफ अपराधी!
राजस्थान

खौफ में लोग, बेखौफ अपराधी!

Share
Share

खास रिपोर्ट करतार सिंह के साथ
जयपुर ‘पधारो म्हारे देश’ की समृद्ध संस्कृति और शांत छवि के लिए दुनिया भर में पहचाने जाने वाले राजस्थान में हाल के वर्षों में अपराध की प्रकृति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। हालांकि राज्य सरकार और राजस्थान पुलिस प्रशासन द्वारा एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) का गठन कर संगठित अपराध और साइबर क्राइम के खिलाफ लगातार अभियानों की बात कही जा रही है, फिर भी राज्य में घटित हो रहीं छिटपुट और डिजिटल वारदातें आमजन के मन में असुरक्षा का भाव पैदा करती हैं।

​राजस्थान में क्राइम के प्रमुख मोर्चे

साइबर फ्रॉड और मेवात/शेखावाटी बेल्ट का खतरा: भरतपुर, अलवर और शेखावाटी के आसपास के इलाकों में ‘जामताड़ा शैली’ में फल-फूल रहा ऑनलाइन ठगी का नेटवर्क अब पूरे प्रदेश के नागरिकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। फर्जी कॉल और एपीके फाइलों के जरिए जीवनभर की कमाई उड़ाने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।
​गैंगस्टर कल्चर और रंगदारी का जाल: पश्चिमी राजस्थान और राजधानी जयपुर जैसे बड़े शहरों में विदेश या बाहर बैठे गैंगस्टरों के नाम पर व्यापारियों और कोचिंग संचालकों से रंगदारी (Extortion) मांगने की घटनाएं सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
​महिलाओं व बच्चों से जुड़ी सुरक्षा: एनसीआरबी (NCRB) आंकड़ों और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, हालांकि हाल के दौर में केस दर्ज होने की प्रक्रिया आसान होने से मामलों की रिपोर्टिंग बढ़ी है, लेकिन महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ अपराधों पर त्वरित न्याय (Conviction Rate) की गति में और सुधार की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
​जमीनी विवाद और नशे का बढ़ता कारोबार: सीमावर्ती जिलों (श्रीगंगानगर, बीकानेर, बाड़मेर) में नशीले पदार्थों की तस्करी के चलते युवाओं में अपराध का ट्रेंड बढ़ा है, जिसका असर आपसी रंजिश और गंभीर हिंसक वारदातों के रूप में दिखता है।

​पुलिसिंग और सरकारी प्रयास

राजस्थान पुलिस प्रशासन ने लॉ एंड ऑर्डर को मजबूत करने के लिए कई नए कदम उठाए हैं:
​विशेष कार्यबल (AGTF & ANTF): संगठित गिरोहों के सफाए के लिए विशेष टास्क फोर्स और ड्रग्स के खिलाफ एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स को सक्रिय किया गया है।
​नए कानूनों का क्रियान्वयन: राज्य में नए आपराधिक कानूनों (भारतीय न्याय संहिता आदि) के तहत मुकदमों के त्वरित निपटारे और वैज्ञानिक साक्ष्यों के संकलन पर जोर दिया जा रहा है।
​कम्युनिटी पुलिसिंग: साइबर अपराधों से बचाव के लिए जन-जागरूकता अभियानों की शुरुआत की गई है।
​आगे की राह
राजस्थान को अपराधमुक्त बनाने के लिए केवल केस दर्ज करना या आरोपियों की धरपकड़ ही काफी नहीं है; बल्कि फास्ट-ट्रैक अदालतों के जरिए अपराधियों को जल्द सजा दिलाना, पुलिस बल में तकनीक का समावेश बढ़ाना और समाज के स्तर पर नशा-विरोधी अभियानों को गति देना बेहद जरूरी है।

Share

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Don't Miss

धौलपुर के शेरावाली माता मंदिर से लाखों के घंटे पार, 52 किलो का महाघंटा भी चोरी; 5 साल पुराने मामले का भी अब तक सुराग नहीं

​धौलपुर। जिले के सखवारा क्षेत्र स्थित छत्तूपुरा गांव में रविवार मध्य रात्रि बेखौफ बदमाशों ने प्रसिद्ध शेरावाली माता मंदिर को निशाना बनाते हुए...

आत्मरक्षा प्रशिक्षण, महिला सुरक्षा कानूनों, हेल्पलाइन एवं साइबर सुरक्षा की दी जानकारी; महिला पुलिसकर्मियों ने निकाली जागरूकता रैली

धौलपुर। राज्य सरकार एवं राजस्थान पुलिस मुख्यालय के निर्देशानुसार महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा महिला...

Related Articles

70 लाख के लालच में बुजुर्ग का कत्ल!

मुनीम ने साथी संग रची खौफनाक साजिश, कार में गला दबाकर हत्या…...

एटीएस के माध्यम से वाहनों के फिटनेस प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया शुरू

भीलवाड़ा, 11 अगस्त। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के...

खाद्य सुरक्षा योजना में बड़ा फेरबदल, अपात्रों की होगी छंटनी

2.84 लाख लोगों ने किया ‘गिव अप’, 14.05 लाख लाभार्थियों को हर...