सूरजपुर, ग्रेटर नोएडा। ऐतिहासिक बाराही मेला मैदान, सूरजपुर में श्री आदर्श रामलीला कमेटी के तत्वावधान में आयोजित विजय महोत्सव 2026 के छठवें दिन रामायण के अत्यंत मार्मिक एवं प्रेरणादायक प्रसंगों का भव्य मंचन किया गया। राम वन गमन, राजा दशरथ के प्राण त्यागने, प्रभु श्रीराम एवं केवट के संवाद तथा भरत मिलाप के दृश्यों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। रामलीला के दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालु एवं धर्मप्रेमी बंधु उपस्थित रहे और प्रभु श्रीराम के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।

राम वन गमन ने किया भावुक
रामलीला में जब प्रभु श्रीराम ने पिता के वचन की मर्यादा रखने के लिए राजमहल का सुख त्यागकर वन जाने का निर्णय लिया, तो दर्शक भावुक हो उठे। माता सीता और लक्ष्मण जी भी उनके साथ वन की ओर प्रस्थान करते हैं। यह प्रसंग त्याग, कर्तव्य, आज्ञापालन और मर्यादा का संदेश देता है।
रामचरितमानस की चौपाई:
रघुकुल रीति सदा चलि आई।
प्राण जाए पर बचनु न जाई॥
यह चौपाई रघुकुल की उस महान परंपरा को दर्शाती है, जिसमें प्राणों से बढ़कर वचन की मर्यादा को महत्व दिया जाता है।
राजा दशरथ के निधन का मार्मिक दृश्य
पुत्र वियोग में राजा दशरथ की व्याकुलता और अंततः उनके प्राण त्यागने के दृश्य ने दर्शकों की आंखें नम कर दीं। पुत्र श्रीराम के प्रति उनके असीम प्रेम और वियोग की पीड़ा का कलाकारों ने भावपूर्ण चित्रण किया।
रामचरितमानस की चौपाई:
राम राम कहि राम कहि, राम राम कहि राम।
तनु परिहरि रघुबर बिरहँ, राउ गयउ सुरधाम॥
इस प्रसंग ने दर्शाया कि माता-पिता का प्रेम कितना गहरा होता है और परिवार में प्रेम, सम्मान तथा आपसी संबंधों का कितना महत्व है।
राम-केवट संवाद ने दिया भक्ति का संदेश
गंगा पार कराने के प्रसंग में केवट की प्रभु श्रीराम के प्रति अनन्य भक्ति, विनम्रता और प्रेम का सुंदर चित्रण किया गया। केवट ने भगवान को केवल राजा के रूप में नहीं, बल्कि अपने आराध्य के रूप में देखा। इस प्रसंग ने संदेश दिया कि सच्ची भक्ति में धन, पद और प्रतिष्ठा का कोई महत्व नहीं होता; भगवान तो केवल भक्त के प्रेम और समर्पण के भूखे हैं।
रामचरितमानस की चौपाई:
पद पखारि जलु पान करि, आपु सहित परिवार।
पितर पारु करि प्रभुहि पुनि, मुदित गयउ लेइ पार॥
इस प्रसंग के माध्यम से श्रद्धालुओं को सेवा, समर्पण, समानता और प्रभु के प्रति अटूट विश्वास की प्रेरणा मिली।
भरत मिलाप ने दर्शकों को किया भावविभोर
भरत मिलाप का दृश्य रामलीला का विशेष आकर्षण रहा। जब भरत जी अपने बड़े भाई श्रीराम को अयोध्या वापस ले जाने के उद्देश्य से वन पहुंचे, तो दोनों भाइयों के मिलन ने पूरे वातावरण को भावुक कर दिया। भरत जी ने राजसिंहासन का मोह त्यागकर श्रीराम के प्रति अपने प्रेम, त्याग और भ्रातृभक्ति का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया।
रामचरितमानस की चौपाई:
करत दंडवत देखि तेहि भरत लीन्ह उर लाइ।
मनहुँ लखन सन भेंट भइ प्रेमु हृदयँ न समाइ॥
इस प्रसंग ने समाज को परिवार में प्रेम, भाईचारे, त्याग, कर्तव्य और आपसी सम्मान बनाए रखने की प्रेरणा दी।
कमेटी के पदाधिकारी एवं गणमान्य व्यक्ति रहे उपस्थित
इस अवसर पर श्री आदर्श रामलीला कमेटी के अध्यक्ष चौधरी सतबीर सिंह भाटी के नेतृत्व में कमेटी के पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का कुशल संचालन रामलीला कमेटी के महामंत्री पंडित सत्यपाल शर्मा ने किया! और इस मौके पर कोषाध्यक्ष विशाल गोयल, उपाध्यक्ष सुभाष चंद्र शर्मा RK कसैट, उपाध्यक्ष ठाकुर ओमपाल सिंह भाटी, संगठन मंत्री सुभाष चंद्र पाराशर, संगठन मंत्री राजेश ठेकेदार, प्रचार मंत्री सुनील सोनिक, अशोक शर्मा, जयपाल ठेकेदार, विनोद पंडित जी (तेल वाले), पूजा प्रमुख अभिनेंद्र यादव, अनिल भाटी, प्रबंधक लक्ष्मण सिंघल, कमलदीप शर्मा, देवा पंडित, अनिल शर्मा एडवोकेट सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
कमेटी के पदाधिकारियों ने कहा कि श्री आदर्श रामलीला कमेटी का उद्देश्य रामायण के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाना तथा नई पीढ़ी को भगवान श्रीराम के जीवन, त्याग, मर्यादा, सत्य और धर्म के मार्ग से परिचित कराना है।
ऐतिहासिक बाराही मेला मैदान में आयोजित विजय महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। हजारों की संख्या में उपस्थित धर्मप्रेमी बंधुओं ने रामलीला का आनंद लिया और प्रभु श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
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