44 करोड़ के उप जिला अस्पताल के निर्माण स्थल का विरोध तेज, विधायक समर्थकों ने खोली दुकानें; पुलिस जाप्ते की निगरानी में निकला जुलूस
जहाजपुर /भीलवाडा (घनश्याम बोकोलिया) 44 करोड़ रुपए की लागत से प्रस्तावित उप जिला चिकित्सालय के निर्माण स्थल को लेकर जहाजपुर में विरोध अब खुलकर सड़कों पर आ गया है। नगदी बांध के समीप चयनित निर्माण स्थल के विरोध में सोमवार को अस्पताल बचाओ संघर्ष समिति और वरिष्ठ नागरिक मंच के आह्वान पर जहाजपुर के बाजार बंद रहे। अधिकांश दुकानदारों ने प्रतिष्ठान बंद रखकर प्रशासन के फैसले के खिलाफ नाराजगी जताई। बंद के चलते मुख्य बाजारों में दिनभर सन्नाटा पसरा रहा।
बंद के बीच खुलीं दुकानें, दिखा दो धड़ों का असर
बंद का असर व्यापक रहा, लेकिन तस्वीर पूरी तरह एकतरफा नहीं रही। क्षेत्रीय विधायक गोपीचंद मीणा की अपील पर उनके समर्थक व्यापारियों, टाक समाज तथा अल्पसंख्यक समाज के कुछ दुकानदारों ने प्रतिष्ठान खोलकर विधायक और प्रस्तावित विकास कार्य के प्रति समर्थन जताया। इसके बावजूद मुख्य बाजारों में सामान्य दिनों की अपेक्षा व्यापारिक गतिविधियां काफी सीमित रहीं। फल-सब्जी जैसी दैनिक जरूरतों की दुकानें और मंडियां सामान्य रूप से संचालित होती रहीं।
जुलूस में गूंजा विरोध, सीएम के नाम सौंपा ज्ञापन
दोपहर बाद संघर्ष समिति के नेतृत्व में व्यापारी और नागरिक बड़ी संख्या में एकजुट हुए। जुलूस के रूप में उपखंड अधिकारी कार्यालय पहुंचे प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर अस्पताल का निर्माण स्थल बदलने की मांग बुलंद की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि अस्पताल जैसी महत्वपूर्ण सुविधा का निर्माण ऐसा स्थान चुनकर किया जाना चाहिए, जिससे आमजन और व्यापारियों के हित प्रभावित न हों।
ज्ञापन सौंपने के दौरान वरिष्ठ नागरिक मंच अध्यक्ष शंकरलाल मंडोवरा, ओमप्रकाश स्वर्णकार और शशिकांत पत्रिया सहित बड़ी संख्या में व्यापारी, नागरिक और गणमान्य लोग मौजूद रहे।
पुलिस की कड़ी निगरानी, संवेदनशील इलाकों में जाप्ता
बंद के ऐलान के बाद प्रशासन ने कानून-व्यवस्था को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस जाप्ता तैनात रहा। एडिशनल एसपी अंजुम कायल, डिप्टी रेवड़मल मौर्य और थानाधिकारी दयाराम चौधरी ने कस्बे की स्थिति पर लगातार नजर रखी।
अस्पताल पर आमने-सामने आए समर्थन और विरोध
जहाजपुर में 44 करोड़ के अस्पताल का मुद्दा अब सिर्फ निर्माण स्थल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि व्यापारी, नागरिक और राजनीतिक समर्थन-विरोध के बीच शक्ति प्रदर्शन का रूप लेता नजर आ रहा है। एक ओर संघर्ष समिति चयनित स्थल बदलने पर अड़ी है, वहीं विधायक समर्थक इसे क्षेत्र के विकास से जोड़कर समर्थन में खड़े हैं। ऐसे में अब निगाहें प्रशासन और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।
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