जयपुर बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष कर्नल देव आनंद गुर्जर ने उठाई मांग; पदाधिकारियों ने प्रधानमंत्री और जम्मू-कश्मीर नेतृत्व के समक्ष मामला उठाने का समर्थन किया
रिपोर्ट: करतार सिंह
जयपुर, 27 अगस्त 2026: अंतरराष्ट्रीय गुर्जर महासभा ने जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में एक नाबालिग गुर्जर आदिवासी छात्रा की दुखद मृत्यु के मामले की जाँच स्थानीय पुलिस से हटाकर किसी स्वतंत्र जाँच एजेंसी अथवा स्थानीय पुलिस से अलग किसी स्वतंत्र जाँच दल को सौंपने की मांग की है। यह मांग अंतरराष्ट्रीय गुर्जर महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कर्नल देव आनंद गुर्जर ने गुरुवार को जयपुर में संगठन की एक बैठक को संबोधित करते हुए उठाई। बैठक में उपस्थित पदाधिकारियों और सदस्यों ने इस मांग का समर्थन किया तथा मामले को प्रधानमंत्री और जम्मू-कश्मीर के वरिष्ठ नेतृत्व के समक्ष उठाने का निर्णय लिया।
किश्तवाड़ के गुरिनाला/छातरू क्षेत्र स्थित बुमलपोरा सरकारी मिडिल स्कूल की छात्रा की 20 अगस्त 2026 को गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताओं और कथित रूप से गर्भावस्था समाप्त कराने के प्रयास के बाद चिकित्सा उपचार के लिए ले जाते समय मृत्यु हो गई। रिपोर्टों के अनुसार, उसने मृत शिशु को जन्म दिया था और विशेष चिकित्सा उपचार के लिए ले जाते समय उसकी मृत्यु हो गई। इस घटना से गुर्जर-बकरवाल समुदाय में व्यापक चिंता पैदा हुई है।
पुलिस ने FIR संख्या 34/2026 पुलिस थाना छातरू में POCSO अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज की है। सरकारी स्कूल शिक्षक खालिद हुसैन को यौन शोषण से संबंधित आरोपों में मुख्य आरोपी बताया गया है। उसके भाई तारिक हुसैन तथा तीन अन्य—फारूक अहमद, मोहम्मद इशाक और रियाज अहमद—को भी गिरफ्तार किया गया है, जिससे कुल गिरफ्तारियों की संख्या पाँच हो गई है। मामले की जाँच के लिए किश्तवाड़ के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रदीप सिंह के नेतृत्व में छह सदस्यीय SIT गठित की गई है।
आरोपी शिक्षक को शिक्षा विभाग द्वारा निलंबित किए जाने की भी जानकारी सामने आई है। 27 अगस्त को पुलिस ने मामले में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धाराएँ भी जोड़ीं, जिनमें धारा 3(1)(w)(i), 3(2)(v) और 3(2)(va) शामिल हैं। यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मृत छात्रा गुर्जर अनुसूचित जनजाति से संबंधित थी।
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) ने भी 25 अगस्त को मामले का संज्ञान लेते हुए वरिष्ठ जम्मू-कश्मीर अधिकारियों से तथ्य और अब तक की कार्रवाई की रिपोर्ट माँगी है। आयोग ने यह कार्रवाई अपनी संवैधानिक शक्तियों के तहत की है।
जयपुर की बैठक को संबोधित करते हुए कर्नल देव आनंद गुर्जर ने कहा कि गिरफ्तारियाँ, SIT का गठन और अन्य कानूनी कदम महत्वपूर्ण हैं, लेकिन स्थानीय जाँच को लेकर पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों के बीच विश्वास का गंभीर संकट सामने आया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि महासभा किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने की मांग नहीं कर रही है और कानून की उचित प्रक्रिया में उसका पूरा विश्वास है। लेकिन पुलिस, प्रशासन, चिकित्सा व्यवस्था या अन्य अधिकारियों की संभावित लापरवाही, प्रभाव, साक्ष्य छिपाने, कर्तव्य में चूक या संलिप्तता को लेकर कोई सवाल उठता है तो उसकी भी स्वतंत्र जाँच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जाँच में कथित शोषण और गर्भावस्था की जानकारी से लेकर चिकित्सा उपचार, गर्भावस्था समाप्त कराने के कथित प्रयास, छात्रा को विभिन्न स्थानों पर ले जाने और उसकी मृत्यु से पहले की परिस्थितियों तक पूरी घटनाक्रम की कड़ी स्थापित की जानी चाहिए। सभी मेडिकल, फोरेंसिक, दस्तावेजी और डिजिटल साक्ष्यों की निष्पक्ष जाँच आवश्यक है।
अंतरराष्ट्रीय गुर्जर महासभा ने भारत सरकार और जम्मू-कश्मीर सरकार से आग्रह किया है कि मामले की जाँच स्थानीय पुलिस से अलग किसी स्वतंत्र एजेंसी या स्वतंत्र जाँच दल को सौंपी जाए तथा जाँच पेशेवर, निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध हो।
महासभा ने प्रधानमंत्री, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री और जनजातीय कार्य मंत्री से पीड़ित परिवार तथा समुदाय की मांग पर संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई करने का आग्रह किया है।
गुर्जर-बकरवाल समुदाय को भारत, उसके संविधान और उसकी संस्थाओं पर विश्वास है। इस विश्वास की रक्षा की जानी चाहिए।
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