धौलपुर। टाइगर रिजर्व क्षेत्र से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल और जिला कलक्टर के मध्य महत्वपूर्ण वार्ता हुई। वार्ता में संघर्ष समिति ने टाइगर रिजर्व के कोर एरिया विस्तार, वनाधिकार कानून (FRA), ग्राम सभाओं की असहमति तथा ग्रामीणों के अधिकारों से जुड़े कई गंभीर मुद्दे उठाए। संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र का विस्तार बिना पर्याप्त अनुमति और ग्रामीणों की सहमति के किया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि मुकुन्दरा, रणथम्भौर और कैलादेवी-करौली सहित अन्य टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में कोर एरिया विस्तार की प्रक्रिया किस आधार पर की गई तथा इसके लिए आवश्यक वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन क्यों नहीं किया गया। प्रतिनिधियों का कहना था कि बफर क्षेत्र में आयोजित ग्राम सभाओं में ग्रामीणों ने असहमति जताई थी, इसके बावजूद आगे की कार्यवाही की गई। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर पर्याप्त कोरम के बिना दस्तावेज तैयार कर कंसल्टेशन की प्रक्रिया पूरी दिखाना गलत है।
वार्ता के दौरान आंदोलनकारियों ने कुंभलगढ़ सेंचुरी का उदाहरण दिया/संघर्ष समिति ने झिरी क्षेत्र में चारागाह एवं सिवायचक भूमि को कोर एरिया में शामिल किए जाने पर भी आपत्ति जताई।
प्रतिनिधियों ने कहा कि वन विभाग की विभिन्न पाबंदियों के कारण गांवों में लोगों को अपने पारंपरिक अधिकारों के उपयोग में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। बैठक में वैध खनन से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए। जिला कलक्टर ने कहा कि जहां वैधानिक रूप से खनन की संभावना है, वहां भूमि डायवर्जन सहित आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं के लिए प्रयास किए जा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वन भूमि के फर्जी पट्टे तैयार कर उन्हें बेचने वाले माफियाओं की गतिविधियां गंभीर विषय हैं और ऐसे मामलों पर सतर्कता आवश्यक है।
जिला कलक्टर ने संघर्ष समिति को आश्वस्त किया कि उनके द्वारा रखी गई सभी मांगों और सुझावों को राज्य सरकार के समक्ष भेजा जाएगा, ताकि राज्य स्तर पर आवश्यक निर्णय लिया जा सके। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी मांग अथवा अधिकार से जुड़े निर्णय की प्रक्रिया में ग्राम सभा की भूमिका महत्वपूर्ण है और सबसे पहले ग्राम सभा का होना आवश्यक है। जिला कलक्टर ने कहा कि पंचायतों के अधिकारों का कोई हनन नहीं कर सकता।
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