धौलपुर। मंगलवार को राष्ट्रीय राजमार्ग-123 पर हुए दर्दनाक सड़क हादसे में तीन लोगों की मृत्यु के बाद परिवहन विभाग की टीम ने दुर्घटना स्थल का निरीक्षण कर हादसे के संभावित कारणों का जायजा लिया। परिवहन निरीक्षक मुकुल कुंद्रा ने मौके पर पहुंचकर सड़क की स्थिति, मोड़ की बनावट, दृश्यता तथा सुरक्षा इंतजामों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सामने आया कि जिस स्थान पर हादसा हुआ, वहां सड़क पर अत्यधिक घुमावदार मोड़ होने के कारण सामने से आने वाले वाहनों की दृश्यता काफी कम हो जाती है। मोड़ के कारण वाहन चालकों को सामने से आ रहा वाहन समय रहते दिखाई नहीं देता। ऐसे में तेज गति से आ रही कार सामने से आ रहे ट्रक से टकरा गई, जिससे भीषण हादसा हुआ और तीन लोगों की जान चली गई।
परिवहन निरीक्षक मुकुल कुंद्रा के अनुसार दुर्घटना स्थल पर ओवरस्पीड, खतरनाक मोड़ और निर्धारित स्पीड लिमिट से संबंधित पर्याप्त चेतावनी एवं सूचना बोर्ड भी नजर नहीं आए। सड़क की मौजूदा स्थिति को देखते हुए वाहन चालकों को पहले से सावधान करने के लिए पर्याप्त रोड सेफ्टी इंतजाम किया जाना आवश्यक है।
विजिबिलिटी बढ़ाने के लिए पेड़ों की कटिंग जरूरी
निरीक्षण में यह भी सामने आया कि घुमावदार मोड़ पर सड़क की विजिबिलिटी बेहतर करने के लिए आसपास की झाड़ियों एवं पेड़ों की नियमित कटिंग की आवश्यकता है। पेड़ों और झाड़ियों के कारण यदि मोड़ पर दृश्यता बाधित होती है तो वाहन चालक सामने से आने वाले वाहनों को समय पर नहीं देख पाते। इसलिए संबंधित विभाग को नियमित रूप से पेड़ों की छंटाई कर सड़क की विजिबिलिटी सुनिश्चित करनी चाहिए।
खतरनाक मोड़ से पहले लगाए जाएं चेतावनी बोर्ड
दुर्घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मोड़ से पर्याप्त दूरी पहले ‘खतरनाक मोड़’, ‘धीमी गति से चलें’, ‘स्पीड लिमिट’ और आगे खतरनाक घुमाव है ,अन्य आवश्यक चेतावनी संकेतक लगाए जाने की जरूरत है। रात के समय वाहन चालकों को संकेत स्पष्ट रूप से दिखाई दें, इसके लिए रिफ्लेक्टिव एवं बेहतर विजिबिलिटी वाले साइन बोर्ड लगाए जाने चाहिए।
रंबल स्ट्रिप से कम की जा सकती है वाहनों की रफ्तार
परिवहन विभाग के निरीक्षण के अनुसार ऐसे संवेदनशील एवं दुर्घटना संभावित स्थान पर वाहन चालकों की गति नियंत्रित करने के लिए आवश्यकतानुसार लॉन्ग रंबल स्ट्रिप/रंबल स्टेप बनाए जाना भी उपयोगी रहेगा। इससे चालक मोड़ से पहले ही वाहन की गति कम कर सकेंगे और दुर्घटना की आशंका को कम किया जा सकता है।
सड़क सुरक्षा ऑडिट की जरूरत
लगातार दुर्घटनाओं की संभावना वाले स्थानों को चिन्हित कर संबंधित विभागों द्वारा सड़क सुरक्षा ऑडिट कराया जाना चाहिए। ऑडिट के दौरान सड़क की चौड़ाई, मोड़ की स्थिति, विजिबिलिटी, साइन बोर्ड, रिफ्लेक्टर, रोड मार्किंग, स्ट्रीट लाइटिंग और वाहनों की गति जैसे सभी पहलुओं की जांच की जानी चाहिए। परिवहन विभाग का मानना है कि सड़क दुर्घटनाओं को केवल वाहन चालकों की लापरवाही से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। दुर्घटना संभावित स्थानों पर सड़क की संरचना और सुरक्षा व्यवस्थाओं में सुधार भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि समय रहते इस स्थान पर उचित संकेतक, गति नियंत्रण के उपाय और पर्याप्त विजिबिलिटी की व्यवस्था की जाए तो भविष्य में होने वाली दुर्घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
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