धौलपुर। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की अनुपालना में सम्पूर्ण राजस्थान राज्य में स्कूली छात्रों के लिए ट्रांसर्फोमेटिव टयूज्डे नामक एक विशेष अभियान का शुभारंभ किया गया है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किशोर छात्रों को उनके विधिक अधिकार, कर्तव्यों और साइबर अपराध, बाल विवाह एवं नशे को ना हो, अपने सपनों को हां कहो नशा कोई स्टाइल नहींः अपने मन, शरीर और भविष्य की रक्षा करों, शोषण के ख़लिफ़ आवाज़ उठाएँ, अपने शरीर और मन की रक्षा करें; गुड टच और बैड टच के बीच का फ़र्क समझें और सुरक्षित रहें एवं सितंबर माह के अंतर्गत विषय अजनबियों से सावधान-मना करो, दूर जाओ, बताओ जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक-विधिक मुद्दों के प्रति संवेदनशील बनाना है। सचिव रेखा यादव एवं सभी न्यायिक अधिकारीगणों ने संयुक्त रूप से विभिन्न विद्यालयों में ट्रांसर्फोमेटिव टयूज्डे के अंतर्गत विषय अजनबियों से सावधान-मना करो, दूर रहो, बताओ के संबंध में विधिक जागरुकता शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें सचिव रेखा यादव ने विद्यालय में बच्चों को अजनबी व्यक्ति से उत्पन्न संभावित खतरे के संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि कोई अनजान व्यक्ति यदि उन्हें अपने साथ चलने, चॉकलेट, खिलौने, पैसे देने अथवा किसी अन्य प्रकार का लालच देकर बहलाने का प्रयास करे तो उसके साथ नहीं जाना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति माता-पिता या परिचित का नाम लेकर भी बच्चे को अपने साथ ले जाने का प्रयास करे, तो पहले अपने माता-पिता, शिक्षक अथवा किसी विश्वसनीय व्यक्ति से इसकी पुष्टि करनी चाहिए साथ ही बच्चों को विशेष रूप से नो गो टेल का संदेश देते हुए समझाया कि इसके अंतर्गत संदिग्ध व्यक्ति या परिस्थिति होने पर नो अर्थात स्पष्ट रूप से मना करें, गो अर्थात तत्काल उस स्थान से हटकर सुरक्षित स्थान पर जाएं तथा टैल अर्थात घटना की जानकारी तुरंत माता-पिता, शिक्षक अथवा किसी विश्वसनीय व्यक्ति को दें साथ ही बच्चों को यह भी बताया गया कि अपहरण एवं बहला-फुसलाकर ले जाने की घटनाएं बच्चों को गंभीर परिस्थितियों में डाल सकती हैं। ऐसे मामलों में बच्चों के बाल श्रम, जबरन भीख मंगवाने, बाल तस्करी एवं अन्य प्रकार के शोषण का शिकार होने का खतरा रहता है। इसलिए बच्चों को किसी भी संदिग्ध परिस्थिति को छिपाने के बजाय तत्काल किसी भरोसेमंद व्यक्ति को बताना चाहिए। इस अवसर पर बच्चों को उनके कानूनी अधिकारों एवं विधिक सहायता के संबंध में भी जानकारी दी गई तथा बताया गया कि किसी भी प्रकार की कानूनी समस्या या अपराध की स्थिति में वे अपने अभिभावकों, पुलिस, विद्यालय के जिम्मेदार व्यक्तियों अथवा विधिक सेवा प्राधिकरण से सहायता प्राप्त कर सकते हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में सतर्कता, आत्म-सुरक्षा एवं किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या परिस्थिति के विरुद्ध आवाज उठाने की क्षमता विकसित करना रहा। बच्चों को संदेश दिया गया कि सुरक्षा के लिए जागरूक रहना, खतरे को पहचानना और समय पर किसी विश्वसनीय व्यक्ति को जानकारी देना अत्यंत आवश्यक है साथ ही कोर्ट वाली दीदी सुझाव पेटिका के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी।
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