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इलाहाबाद हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला, एक साथ नहीं लगायी जा सकती आईपीसी की धारा 420 और 409

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कोर्ट ने रद की मेरठ के सिविल लाइंस थाने में दर्ज अभिषेक गौतम के खिलाफ केस को संज्ञान लेने और सम्मन की कार्रवाई

प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि भारतीय दण्ड संहिता की धारा 420 और 406 एक साथ नहीं लगायी जा सकती। किसी केस में यह दोनों धाराएं एक साथ लगायी गयी हैं तो वह केस कानून की नजर में टिक नहीं सकता। यह फैसला जस्टिस सौरभ श्रीवास्तव की सिंगल बेंच ने सुनाया है। सिंगल बेंच ने मेरठ जिले के सिविल लाइंस थाने में दर्ज (राज्य बनाम अभिषेक गौतम) केस को संज्ञान लिये जाने और उस पर जारी सम्मन को रद कर दिया है।
बीएनएसएस की धारा 528 के यह आवेदन याचिकाकर्ता अभिषेक गौतम ने हाई कोर्ट में दाखिल करके अपर मुख्य न्यायाधीश कोर्ट नंबर 10 में लंबित केस नंबर 17908/2025 (स्टेट बनाम अभिषेक गौतम) में जारी संज्ञान/सम्मन आदेश को चुनौती दी थी। यह केस, केस क्राइम नंबर 137/2025 (धारा 420, 406, 504, 506 आईपीसी, थाना सिविल लाइन्स, जिला मेरठ) से जुड़ा है। याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम और अतिप्रिया गौतम एडवोकेट ने और राज्य सरकार की तरफ से एजीए ने पक्ष रखा।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि प्रथम सूचना रिपोर्ट में जो भी तथ्य दिये गये हैं वह गलत तथ्यों पर आधारित है। केस में दिये गये तथ्य मनमाने और मनगढ़ंत हैं, जिसका वास्तविकता से कोई लेना देना नहीं है। राज्य की पेश हुए अधिवक्ता ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता की तरफ से पेश किये गये तर्कों का विरोध किया।
दोनों पक्षों की ओर से पेश किये गये तर्कों को सुनने के बाद कोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली रेस क्लब केस में सुनाये गये लैंडमार्क फैसले का जिक्र किया जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आपराधिक विश्वासघात और धोखाधड़ी के बीच फर्क है। धोखाधड़ी के लिएए गलत या गुमराह करने वाली बात कहते समयए यानी शुरुआत से ही आपराधिक नीयत का होना जरूरी है। आपराधिक विश्वासघात मेंए सिर्फ यह साबित करना काफी है कि कोई चीज भरोसे में सौंपी गई थी। इस तरह आपराधिक विश्वासघात के मामले में अपराधी को कानूनी तौर पर संपत्ति सौंपी जाती है और वह बेईमानी से उसका गलत इस्तेमाल करता है। जबकि धोखाधड़ी के मामले मेंए अपराधी किसी व्यक्ति को धोखा देकर या बहकाकर कोई संपत्ति देने के लिए उकसाता है। ऐसी स्थिति मेंए दोनों अपराध एक साथ नहीं हो सकते, बेंच ने मेरठ जिले के सिविल लाइंस थाने में दर्ज (राज्य बनाम अभिषेक गौतम) केस को संज्ञान लिये जाने और उस पर जारी सम्मन को रद कर दिया है।

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