खास रिपोर्ट: करतार सिंह
जयपुर। राजस्थान में नगर निकाय चुनाव को लेकर चुनावी तस्वीर अब साफ हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक नगर निकाय चुनाव की प्रक्रिया अगस्त से शुरू होकर सितंबर में मतदान और मतगणना के साथ पूरी होगी।
चुनाव कार्यक्रम के अनुसार 22 अगस्त 2026 को चुनाव की अधिसूचना जारी होगी और इसी दिन से नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 27 अगस्त निर्धारित की गई है। इसके बाद 29 अगस्त को नामांकन पत्रों की जांच होगी।
उम्मीदवारों को नामांकन वापस लेने का मौका भी दिया जाएगा। 31 अगस्त 2026 नाम वापसी की अंतिम तारीख निर्धारित है। इसके बाद 1 सितंबर को चुनाव चिन्हों का आवंटन किया जाएगा। यानी 1 सितंबर के बाद चुनावी मैदान में उतरने वाले प्रत्याशियों की तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी।
इसके बाद प्रदेश में चुनाव प्रचार जोर पकड़ेगा। पहले चरण का मतदान 6 सितंबर और दूसरे चरण का मतदान 9 सितंबर 2026 को कराया जाएगा। वहीं 11 सितंबर को मतगणना कर चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे।
चुनाव कार्यक्रम सामने आने के साथ ही संभावित प्रत्याशियों की राजनीतिक सक्रियता बढ़ गई है। टिकट की दौड़ में शामिल दावेदार पार्टी नेताओं से संपर्क साधने के साथ ही वार्डों में जनसंपर्क तेज कर रहे हैं। स्थानीय स्तर पर सड़क, सफाई, पेयजल, सीवरेज, पार्क, अतिक्रमण और विकास कार्य जैसे मुद्दे चुनाव में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
अब उम्मीदवारों के पास नामांकन से लेकर नाम वापसी तक कुछ ही दिनों का समय है। ऐसे में टिकट वितरण, बगावत और निर्दलीय प्रत्याशियों की एंट्री के बाद कई वार्डों में चुनावी मुकाबला बेहद रोचक होने की संभावना है।
टिकट वितरण पर बढ़ी हलचल, जिताऊ चेहरे की तलाश
नगर निकाय चुनाव की घोषणा के साथ ही भाजपा और कांग्रेस सहित प्रमुख राजनीतिक दलों में टिकट को लेकर दावेदारों की सक्रियता बढ़ गई है। पार्टी स्तर पर संभावित प्रत्याशियों के नामों पर वार्डवार मंथन किया जा रहा है। टिकट वितरण में वार्ड का आरक्षण, प्रत्याशी की स्थानीय पकड़, जनसंपर्क, पार्टी के प्रति सक्रियता और चुनाव जीतने की संभावना अहम आधार माने जा सकते हैं।
संभावित दावेदार पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और संगठन पदाधिकारियों से मुलाकात कर अपना दावा मजबूत करने में जुटे हैं। कई वार्डों में एक से अधिक मजबूत दावेदार होने के कारण पार्टियों के सामने सही चेहरे का चयन चुनौती बन सकता है।
टिकट वितरण के बाद बागी उम्मीदवारों और निर्दलीय प्रत्याशियों की भूमिका भी चुनावी समीकरण बदल सकती है। ऐसे में पार्टियां टिकट देते समय केवल संगठनात्मक निष्ठा ही नहीं, बल्कि वार्ड में प्रत्याशी की स्वीकार्यता और जीत की संभावनाओं को भी प्राथमिकता देंगी।
अब नजर इस बात पर है कि दोनों प्रमुख दल किस वार्ड में किस चेहरे पर दांव लगाते हैं और टिकट नहीं मिलने वाले दावेदारों में से कितने मैदान में उतरकर पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के सामने चुनौती पेश करते हैं।
चुनाव प्रचार की भूमिका अहम
नगर निकाय चुनाव में प्रचार अभियान प्रत्याशियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जाता है। नामांकन और नाम वापसी के बाद प्रत्याशी घर-घर जनसंपर्क, वार्ड बैठकें और छोटी सभाओं के जरिए मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचाएंगे। सड़क, सफाई, पेयजल, सीवरेज, पार्क, स्ट्रीट लाइट और स्थानीय विकास जैसे मुद्दे प्रचार के केंद्र में रहेंगे। राजनीतिक दल भी अपने प्रत्याशियों के समर्थन में स्टार प्रचारकों और वरिष्ठ नेताओं की सभाएं कर माहौल बनाने की कोशिश करेंगे। आने वाले दिनों में जनसंपर्क, संगठन की मजबूती और स्थानीय मुद्दों पर पकड़ ही प्रत्याशियों की चुनावी ताकत तय करेगी।
Leave a comment