धौलपुर। जिले में गर्भवती महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व जांच एवं आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के उद्देश्य से शुक्रवार को जिला स्तर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से फील्ड स्टाफ का आमुखीकरण किया गया। कार्यक्रम मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. धर्मसिंह मीणा के निर्देश पर आयोजित हुआ।
आमुखीकरण के दौरान जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शिवकुमार शर्मा ने फील्डन स्टाफ को एएनसी आदि के बारे में बताया। । इस दौरान जिला स्तर से डीएसी श्रीमती राखी शर्मा, डीपीएम शशांक वशिष्ठ तथा JHPIEGO से सुमित पुरी उपस्थित रहे।
इस दौरान डॉ. शर्मा ने कहा कि प्रत्येक गर्भवती महिला की समय पर एवं गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व जांच मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने फील्ड स्टाफ को गर्भवती महिलाओं की कम से कम चार प्रसवपूर्व जांच सुनिश्चित करने तथा प्रत्येक विजिट में आवश्यक जांच, परामर्श एवं फॉलोअप को गंभीरता से लेने के निर्देश दिए।
ANC के प्रमुख घटकों की दी जानकारी आमुखीकरण में गर्भावस्था के दौरान आयरन-फोलिक एसिड, कैल्शियम, टी.टी. टीकाकरण एवं कृमिनाशक दवा सहित आवश्यक प्रोफाइलेक्सिस की जानकारी दी गई। साथ ही प्रत्येक ANC विजिट में महिला का वजन मापने तथा वजन वृद्धि की निगरानी करने पर जोर दिया गया। फील्ड स्टाफ को गर्भवती महिला की पिछली स्वास्थ्य एवं गर्भावस्था संबंधी जानकारी दर्ज करने के साथ तापमान, नाड़ी, श्वसन गति, रक्तचाप, वजन एवं ऊंचाई की जांच करने तथा पीलिया एवं पैरों में सूजन जैसे लक्षणों की जांच करने के बारे में बताया गया। हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान पर जोर प्रशिक्षण में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (HRP) की समय पर पहचान, आवश्यक उपचार, रेफरल एवं फॉलोअप सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही गर्भवती महिलाओं में ब्लीडिंग, तेज सिरदर्द या धुंधला दिखाई देना, तेज बुखार, पेट में तेज दर्द, पानी का रिसाव तथा भ्रूण की हलचल कम होना जैसे खतरे के लक्षणों की पहचान कर तत्काल स्वास्थ्य संस्थान पर रेफर करने के निर्देश दिए गए।
HB और यूरिन जांच को बताया महत्वपूर्ण डॉ. शर्मा ने गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की पहचान एवं रोकथाम के लिए हीमोग्लोबिन जांच अनिवार्य रूप से कराने तथा रिपोर्ट के अनुसार उपचार एवं आवश्यक होने पर रेफरल सुनिश्चित करने को कहा। इसके साथ ही पेशाब में प्रोटीन एवं शुगर की जांच के माध्यम से गर्भावस्था संबंधी संभावित जटिलताओं की समय पर पहचान करने की जानकारी दी गई। गर्भवती महिला की HIV जांच एवं रक्त समूह की जांच सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया। आमुखीकरण के दौरान गर्भावस्था में होने वाले सामान्य शारीरिक बदलावों एवं असामान्य लक्षणों की पहचान, ANC के दौरान क्या करना है और क्या नहीं करना है, सहित आवश्यक स्वास्थ्य परामर्श के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई।
उन्होंने फील्ड स्टाफ से कहा कि गर्भवती महिलाओं को नियमित जांच, आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं लेने तथा किसी भी खतरे के लक्षण दिखाई देने पर बिना देरी किए स्वास्थ्य संस्थान से संपर्क करने के लिए जागरूक करें। उन्होंने बताया कि गुणवत्तापूर्ण ANC सेवाओं के माध्यम से गर्भावस्था के दौरान संभावित जोखिमों की समय रहते पहचान कर उपचार, रेफरल एवं फॉलोअप की उचित व्यवस्था की जा सकती है, जिससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य परिणामों में सुधार लाया जा सके।
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