नोएडा: नोएडा में इंजीनियर युवराज मेहता की मौत की जांच के लिए गठित एसआईटी टीम ने नोएडा अथॉरिटी के बोर्ड रूम में मीटिंग की है। यह मीटिंग तीन घंटे तक चली है। मीटिंग खत्म होने के बाद एसआईटी के सदस्य सेक्टर 150 के घटनास्थल पर स्पॉट का मुआयना करने निकले हैं।
बोर्ड रूम की इस मीटिंग में डीएम मेधा रूपम और पुलिस कमिश्नर मौजूद रहे। इस दौरान एसआईटी ने युवराज के पिता व फैमिली के अन्य लोगों के बयान भी लिए। इस कार्यवाही से पूरी अथॉरिटी में खलबली का माहौल बना हुआ है। अटकलें हैं कि अथॉरिटी के ट्रैफिक सेल विभाग के अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है। एसआईटी की टीम ने इस बात पर भी नाराजगी जताई है कि इतनी बड़ी घटना घटने के बाद भी मौके पर कोई सीनियर अधिकारी नहीं गया।
शुक्रवार की रात को गुरुग्राम से नोएडा लौटते हुए युवराज मेहता की कार टूटी हुई बाउंड्री वॉल से होती हुई पानी भरे गहरे गड्ढे में जा गिरी थी। घने कोहरे की वजह से युवराज को बाउंड्री वॉल नहीं दिखाई दी थी। इसके बाद उन्होंने अपने पिता को कॉल करके बुलाया।
उनके पिता वहां पहुंचे। उनकी सूचना पर पुलिस, फायर ब्रिगेड और दूसरे राहत और बचावकर्मी भी वहां आ गए। युवराज दो घंटे तक अपनी कार की छत से मदद की गुहार लगाते रहे लेकिन उन्हें बचाने के लिए कोई भी ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अंतत: पानी में डूबने से उनकी मौत हो गई।
इस दर्दनाक घटना से जनता में बेहद नाराजगी थी। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस हादसे की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है। इस टीम में मेरठ के मंडलायुक्त, मेरठ जोन के एडीजी और पीडब्ल्यूजी के मुख्य अभियंता शामिल हैं। इनसे पांच दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी गई है।
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