छात्र राजनीति से शुरू हुआ सफर, जयपुर के महापौर और सांगानेर के विधायक तक पहुंचा
स्पेशल:स्टोरी करतार सिंह की कलम से
राजस्थान की राजनीति में अशोक लाहोटी का नाम उन नेताओं में लिया जाता है, जिन्होंने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत छात्र राजनीति से की और धीरे-धीरे संगठन, नगर निगम तथा विधानसभा की राजनीति में अपनी जगह बनाई। 31 मार्च 1976 को बीकानेर में जन्मे लाहोटी की राजनीतिक कर्मभूमि मुख्य रूप से जयपुर रही है।

1996-97: राजस्थान विश्वविद्यालय से सियासी शुरुआत
अशोक लाहोटी का सक्रिय राजनीतिक सफर राजस्थान विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति से शुरू हुआ। वर्ष 1996-97 में वे राजस्थान विश्वविद्यालय छात्रसंघ के उपाध्यक्ष बने। इसके बाद छात्र राजनीति में उनकी सक्रियता लगातार बढ़ती गई।
2000-01: छात्रसंघ अध्यक्ष बने
सियासी सफर में अगला बड़ा पड़ाव वर्ष 2000-01 रहा, जब अशोक लाहोटी राजस्थान विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष निर्वाचित हुए। छात्र राजनीति में यह उनका महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है और यहीं से संगठनात्मक राजनीति में उनकी पहचान मजबूत हुई।
2002-03: युवा गतिविधियों में भूमिका
वर्ष 2002-03 में वे नेहरू युवा केंद्र के प्रदेश उपाध्यक्ष रहे। इसके बाद भाजपा संगठन में उनकी सक्रियता बढ़ती गई। उपलब्ध प्रोफाइल में उन्हें राजस्थान भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष तथा भाजपा प्रदेश प्रवक्ता के रूप में भी दर्ज किया गया है।

2014: नगर निगम की राजनीति में एंट्री
वर्ष 2014 में अशोक लाहोटी जयपुर नगर निगम के पार्षद बने। छात्र राजनीति और संगठनात्मक राजनीति के बाद यह उनका प्रत्यक्ष स्थानीय निकाय चुनाव की राजनीति में महत्वपूर्ण प्रवेश था।
2016: जयपुर के महापौर बने
पार्षद बनने के करीब दो साल बाद लाहोटी को जयपुर नगर निगम का महापौर बनाया गया। वे 2016 से 2018 तक जयपुर के महापौर रहे। इस दौरान उनका राजनीतिक कद जयपुर शहर की राजनीति में और मजबूत हुआ।
2018: सांगानेर से विधानसभा चुनाव—सबसे बड़ा चुनावी पड़ाव
2018 में भाजपा ने अशोक लाहोटी को सांगानेर विधानसभा सीट से प्रत्याशी बनाया। मुकाबला कांग्रेस के पुष्पेंद्र भारद्वाज से हुआ। लाहोटी ने 1,07,947 वोट हासिल किए, जबकि पुष्पेंद्र भारद्वाज को 72,542 वोट मिले। लाहोटी की जीत का अंतर 35,405 वोट रहा।
इस चुनाव में भारत वाहिनी पार्टी के घनश्याम तिवारी को 17,371 वोट मिले। इस तरह सांगानेर में त्रिकोणीय मुकाबले ने भी चुनावी समीकरण को प्रभावित किया।
महापौर से विधायक तक—एक साथ दो बड़ी जिम्मेदारियां
2018 विधानसभा चुनाव जीतने के बाद लाहोटी को जयपुर नगर निगम के महापौर पद से इस्तीफा देना पड़ा। वे दिसंबर 2018 में सांगानेर से विधायक निर्वाचित हुए और इसके बाद राजस्थान की 15वीं विधानसभा के सदस्य रहे।
2019-2023: विधानसभा में समितियों की जिम्मेदारी
विधायक रहते हुए लाहोटी को विधानसभा की विभिन्न समितियों में भी जिम्मेदारी मिली। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार वे गृह समिति तथा प्रश्न एवं संदर्भ समिति के सदस्य रहे।
2023: सांगानेर में सत्ता का समीकरण बदला
2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने सांगानेर से अशोक लाहोटी की जगह भजनलाल शर्मा को प्रत्याशी बनाया। भजनलाल शर्मा ने कांग्रेस के पुष्पेंद्र भारद्वाज को हराकर चुनाव जीता। उन्हें 1,45,162 वोट, जबकि पुष्पेंद्र भारद्वाज को 97,081 वोट मिले और जीत का अंतर 48,081 वोट रहा।
इस परिणाम के साथ लाहोटी का विधानसभा कार्यकाल समाप्त हुआ, लेकिन भाजपा की राजस्थान राजनीति में उनकी संगठनात्मक पहचान बनी रही।
2024-2026: संगठनात्मक राजनीति में सक्रियता
2023 के बाद लाहोटी की राजनीतिक भूमिका विधानसभा सदस्य के बजाय संगठन और पार्टी गतिविधियों के इर्द-गिर्द दिखाई देती है। उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड में उन्हें भाजपा से जुड़े नेता तथा पूर्व महापौर और पूर्व विधायक के रूप में दर्ज किया गया है।
राजनीतिक सफर की टाइमलाइन
वर्ष
राजनीतिक पड़ाव
1996-97
राजस्थान विश्वविद्यालय छात्रसंघ उपाध्यक्ष
2000-01
राजस्थान विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष
2002-03
नेहरू युवा केंद्र प्रदेश उपाध्यक्ष
2014
जयपुर नगर निगम पार्षद
2016-18
जयपुर नगर निगम महापौर
2018
सांगानेर से भाजपा विधायक निर्वाचित
2019-23
विधानसभा समितियों में सदस्य
2023
सांगानेर से भाजपा ने नया प्रत्याशी उतारा
2024-26
भाजपा की संगठनात्मक/राजनीतिक गतिविधियों में सक्रियता
जन्मभूमि से कर्मभूमि तक
अशोक लाहोटी की राजनीतिक कहानी को तीन चरणों में देखा जा सकता है—बीकानेर जन्मभूमि, राजस्थान विश्वविद्यालय राजनीतिक पाठशाला और जयपुर कर्मभूमि छात्रसंघ के पद से शुरू हुआ सफर जयपुर नगर निगम के महापौर और फिर सांगानेर के विधायक तक पहुंचा। 2018 का विधानसभा चुनाव उनके राजनीतिक करियर का सबसे बड़ा प्रत्यक्ष चुनावी पड़ाव रहा, जब उन्होंने 1.07 लाख से ज्यादा वोट हासिल कर कांग्रेस के पुष्पेंद्र भारद्वाज को 35,405 वोटों से हराया।
राजनीतिक सफर का सार:
छात्र नेता → संगठनात्मक नेता → पार्षद → जयपुर महापौर → सांगानेर विधायक → भाजपा के वरिष्ठ संगठनात्मक चेहरे के रूप में सक्रियता।
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